क्या है चंद्रयान 3 मिशन, क्या ISRO रचेगा इतिहास?

 हाल ही में इसरो के अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने कहा  है की इसरो के चंद्रयान मिशन के तीसरे संस्करण चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लोन्च किया जायेगा

क्या है चंदयान-3 मिशन

इसरो अध्यक्ष ने कहा है की चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लोन्च कर दिया जायेगा उन्होंने बताया है की अगर चंद्रयान-3 मिशन  सफल हो जाता है तो यह भारत के लिए बहुत बड़ी सफलता होगी क्योकी अभी तक सिर्फ 3 देश ही चाँद पे जा पाए है अमेरिका ,रूस, चीन अभी तक सफल हो पाए है हलाकि आपको बता दे की भारत ने 2008 में चंद्रयान-1 के नाम से चाँद पे गया था लेकिन यह चंद्रयान-1 चाँद के सिर्फ ऑर्बिट में चक्कर लगाया था यह यान चाँद पे लैंड नही किया था सिर्फ चाँद को हाय फ़ाय यानि हेल्लो कह कर वापस आ गया था  तो फिर इसरो ने एक बार और कोशिश करते हुए 22जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 को लोन्च किया परन्तु इस बार भी भारत की हाथ सफलता नही लगी और यह मिशन भी फेल हो गया 1.5 km चाँद से दूर विक्रम लैंडर की संपर्क इसरो से टूट गयी हलकी चंद्रयान-2 को चाँद के south pole पे लैंड होना था south pole पे कोई भी देश अभी तक अपना यान नही भेजा है

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क्या खासियत है चंद्रयान-3 मिशन-की?

चंद्रयान-3 को चाँद के south pole यानि चाँद के दक्षनी धुव पर लैंड किया जायेगा इसके लिए साडी तैयारी कर ली गयी है चंद्रयान-3 को LVM mark-3 ( The Launch Vehicle Mark-III ) से किया जायेगा इसके लिए चंद्रयान-3 के हार्डवेयर संरचना कंप्यूटर सॉफ्टवेर और सेन्सर में सुधर किया गया है साथ ही इसमें अधिक उर्जा के लिए बड़े सौर पैनल लगाये गये है और एक अतिरिक्त सेन्सर भी जोड़ा गया है इसकी गति को मापने के लिए एक लेजर डॉप्लर वेलोसिमीटर,उपकरण लगाया गया है

चंद्रयान-3 के विशेष तथ्य  

चंद्रयान-3 चंद्रयान-2 का ही एक रूप है इसरो के अनुशार चंद्रयान-3 मिशन का तीन मुख्या उद्देश्य है 

  1. चंद्रयान-3 को चाँद पे सॉफ्ट लैंडिंग करना
  2. रोवर को चंद्रमा पे घूमते हुआ प्रदर्शित करना
  3. चाँद के जमीन पर बैज्ञानिक प्रयोगो का संचालन करना

इसरो के अनुशार मिसन के उदेश्यों को प्राप्त करने के लिए लैंडर कई उन्नत तकनीक लगाया गया है

  1. अल्टीमीटर,लेजरऔर RF आधारित अल्टीमीटर लगाया गया है
  2. वेलोसिमीटर,लेजर डॉप्लर वेलोसीमीटर और लैंडर होरिजौन्टल वेलोसिटी कैमरा लगाया गया है
  3. जड़ात्वा माप :लेजर जाइरो आधारित जड़ात्वी सन्दर्भ और एक्सेलेमिटर पैकेज लगाया गया है
  4. प्रणोदन प्रणाली :8००N थ्रोटलेबन लिक्विड इंजन ,58N एटीटयुड थ्रस और थ्रोटलेबन इंजन कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स लगाया गया है
  5. नेविगेशन, मार्गदर्शन और नियंत्रण (एनजीसी): संचालित डिसेंट ट्रैजेक्टरी डिजाइन और सहयोगी सॉफ्टवेयर तत्व लगाया गया है
  6. खतरे का पता लगाना और बचाव: लैंडर खतरे का पता लगाना और बचाव कैमरा और प्रसंस्करण एल्गोरिदम लगाया गया है
उपरोक्त उन्नत प्रौद्योगिकियों को पृथ्वी की स्थिति में प्रदर्शित करने के लिए, कई लैंडर विशेष परीक्षणों की योजना बनाई गई है और उन्हें सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।

एकीकृत शीत परीक्षण – परीक्षण मंच के रूप में हेलीकॉप्टर का उपयोग करके एकीकृत सेंसर और नेविगेशन प्रदर्शन परीक्षण के प्रदर्शन के लिए
एकीकृत हॉट परीक्षण – परीक्षण मंच के रूप में टॉवर क्रेन का उपयोग करके सेंसर, एक्चुएटर्स और एनजीसी के साथ बंद लूप प्रदर्शन परीक्षण के प्रदर्शन के लिए
विभिन्न टच डाउन स्थितियों का अनुकरण करते हुए चंद्र सिमुलेंट परीक्षण बिस्तर पर लैंडर लेग तंत्र प्रदर्शन परीक्षण।

चंद्रयान-3 का भारत में बना हुआ अंतरिक्षय यान है 

चंद्रयान-3 में एक स्वदेशी लैंडर मॉड्यूल प्रोपल्शन मॉड्यूल  और एक रोवर शामिल है, जिसका उद्देश्य अंतर ग्रहीय मिशनों के लिए आवश्यक नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करना और प्रदर्शित करना है। लैंडर में एक निर्दिष्ट चंद्र स्थल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने और रोवर को तैनात करने की क्षमता होगी जो अपनी गतिशीलता के दौरान चंद्र सतह का इन-सीटू रासायनिक विश्लेषण करेगा। लैंडर और रोवर के पास चंद्र सतह पर प्रयोग करने के लिए वैज्ञानिक पेलोड हैं। पीएम का मुख्य कार्य एलएम को लॉन्च वाहन इंजेक्शन से अंतिम चंद्र 100 किमी गोलाकार ध्रुवीय कक्षा तक ले जाना और एलएम को पीएम से अलग करना है। इसके अलावा, प्रोपल्शन मॉड्यूल में मूल्यवर्धन के रूप में एक वैज्ञानिक पेलोड भी है जो लैंडर मॉड्यूल के अलग होने के बाद संचालित किया जाएगा। चंद्रयान-3 के लिए पहचाना गया लॉन्चर LVM3 M4 है जो एकीकृत मॉड्यूल को ~170 x 36500 किमी आकार की एलिप्टिक पार्किंग ऑर्बिट

 

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